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शुक्रवार, 7 मई 2010
आप स्मार्ट व गरीबो के मददगार हो सकते हैं
क्या आप गरीबो की मदद करना चाहते हैं?
क्या आप भूखो को भोजन दिलाना चाहते है?
अगर हम सफल होना चाहते है तो पहले हमें दूसरों को सफल करना होगा हम खुद ब खुद सफल हो जायेंगे
अब आप कहेंगे की हम कैसे दूसरों की मदद कर सकते हैं जब हमारे पास ही पर्याप्त नहीं है|
तरीका मै बताता हूँ-
आप www.freerice.com पर जा के vocabulary गेम खेल सकते हैं|हर सही जवाब पर दस grain चावल गरीबो में वितरित कर दिया जाएगा|
यानी आपकी वर्ड मीनिंग भी बढ़ेगी व आप खुद पर गर्व भी कर सकते हैं की मैंने गरीबो की मदद की
हम सब का जन्म सफल होने के लिए हुआ है|
वार्निंग -इस साईट पर जाकर आप स्मार्ट व गरीबो के मददगार हो सकते हैं|
शुक्रवार, 23 अप्रैल 2010
मौत का शब्द बुजदिलों के किताब में होता है
नेपोलियन से एक बार पूछा गया अगर लडाई के मैदान में आपकी मौत हो गई तो क्या होगा?
इस पर नेपोलियन ने हसते हुए कहा,"मै नहीं जानता की मौत क्या होती है और मौत किसे कहते हैं?मैने जिन्दगी की कहानी पढी है-उसमें मैने मनोबल से जीने के अलावा कुछ सीखा ही नहीं,फिर यह मौत क्या होती है?मौत का शब्द बुजदिलों के किताब में होता है।सुनने वाले भौच्चक्के रह गये।
बुधवार, 21 अप्रैल 2010
जस्ट डू इट
उस महिला की कहानी आपने सुना है क्या?
जिसे मिठाई से बडा प्रेम था।
उसने सोचा कि वह अपनी मिठाई,
उस दिन नहीं बल्कि अगले दिन खायेगी।
समस्या यह थी कि वह टाइटेनिक जहाज पर यात्रा कर रही थी।
जो उसी दिन डूब गया।
लेबल:
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success
बुधवार, 14 अप्रैल 2010
अगर हम सफल होना चाहते हैं
जब हम जीतते हैं तो क्या करते हैं?
कुदते हैं ,चिल्लाते हैं ,खुस होते हैं ,पार्टी मनाते है..............
लेकिन जब हम हारते हैं तो क्या?
तो हमे और ज्यादा खुस होना चाहिए,क्यों?
क्योंकि हमने किसी और को खुस होने,कुदने ,पार्टी मनाने व चिल्लाने का मौका जो दिया है............हमारा एटीच्युड ऐसा ही होना चाहिए........
हम सब का जन्म सफल होने के लिए हुआ है.........................
अगर हम सफल होना चाहते हैं तो,हमें दूसरों को सफल होने में मदद करना चाहिए.................हम खुद ब खुद सफल हो जाएँगे...................
जिंदगी एक गीत है
जिंदगी एक गीत है -इसे गाओ
जिंदगी एक खेल है -इसे खेलो
जिंदगी एक चुनौती है - इसका सामना करो
जिंदगी एक सपना है -इसे साकार करो
जिंदगी एक त्याग है -इसे कर दो
जिंदगी प्रेम है - इसका आनन्द लो
साईं बाबा
शनिवार, 10 अप्रैल 2010
मैदान छोड़ दो!हार मान लो! तुम हार चुके हो
"मैदान छोड़ दो!हार मान लो! तुम हार चुके हो!
वे मुझसे चिल्लाकर कह रहे थे और आग्रह कर रहे थे।
"अब तुम्हारे खिलाफ बहुत ज्यादा मुश्किलें हैं;
इस बार तुम सफल नहीं हो सकते!
और जब मैने अपना सिर
असफलता में झुकाया,
तो एक दौड़ की याद ने
मुझे नीचे गिरने से रोक दिया।
जब मैंने वह दृश्य याद किया,
तो मेरी कमजोर इच्छाशक्ति मजबूत बनने लगी;
क्योंकि उस छोटी सी दौड़ की याद भर से
मेरी आत्मा में स्फूर्ती दौड़ जाती है।
बच्चों की एक दौड़ थी
मुझे कितनी अच्छी तरह याद है।
रोमांच यकीनन!लेकिन डर भी था;
यह बताना मुश्किल नहीं था।
वे सब आशा से भरे लाइन में खडे थे
सभी के मन में सिर्फ दौड़ जीतने का विचार था।
या पहले नम्बर पर टाई करने का या अगर यह न हो सके,
तो कम से कम दूसरे नम्बर पर रहने का।
सभी के पिता बाहर से देख रहे थे
सभी अपने बेटे का हौसला बढा रहे थे।
हर लडका अपने पिता के सामने
दौड़ जीतकर दिखाना चाहता था।
सीटी बजी और वे दौड़ पडे।
छोटे दिल और आशाएँ सुलग रहे थे।
हर छोटे लड़के की इच्छा
जीतने और हीरो बनने की थी।
और एक लडके की खासकर,
जिसके डैडी भीड़ में थे।
वह सबसे आगे दौड़ रहा था और सोच रहा था:
"मेरे डैडी को बहुत गर्व होगा!"
लेकिन अब उसने तेजी से
एक ढ़लान पर दौड लगाई,
तो जीतने के बारे में सोचने वाला वह लडका
लडखडा गया और फिसल गया।
खुद को बचाने की कोशिश करते हुए
उसने अपने हाथ जमीन पर टेकने की कोशिश की,
लेकिन दर्शकों की हँसी के बीच
वह मुँह के बल जमीन पर गिर गया।
वह नीचे गिरा और उसकी उम्मीद भी
-वह अब जीत नहीं सकता-
शर्मिन्दा दुखी होकर वह सोच रहा था
काश वह गायब हो सकता।
लेकिन जब वह गिरा तो उसके डैडी उठकर खडे हुए
और लडके को उनका चिंतित चेहरा दिखा,
जो लड़्के से स्पष्टता से कह रहा था:
"उठो और दौड़ जीत लो"
वह जल्दी से उठा,कोई नुकसान नहीं हुआ था
-वह थोडा सा पिछे था,बस इतनी सी बात थी-
वह पूरी ताकत व मन से भागा,
ताकि गिरने की भरपाई कर सके।
वह आगे निकलने के बारे में इतना चिंतित था
-दूसरों से आगे निकलकर जीतने के लिए-
कि उसका मन उसके पैरों से तेज भागने लगा;
वह फिसल गया और दोबारा गिर गया।
उसने सोचा काश उसने वह दौड़ पहले ही छोड़ दी होती
एक ही अपमान के साथ।
"अब मै धावक के रूप में बेकार हूँ;
अब मुझे कभी दौडने की कोशिस नहीं करनी चाहिए।"
लेकिन उसने हँसती हुई भीड़ में देखा
और उसे वहाँ अपने पिता का चेहरा दिखा;
जिनका स्थाई भाव दोबारा कह रहा था:
"उठो और दौड़ जीत लो!"
इसलिए वह दोबारा कोशिश करने के लिए उछला
-आखिरी धावक से दस गज पीछे-
"अगर मुझे इतने गज का फासला पाटना है,"उसने सोचा,
"तो मुझे बहुत तेज दौडना होगा।"
उसने पूरा दम लगा दिया
उसने आठ या दस को पार भी कर लिया,
लेकिन सबसे आगे निकलने की इतनी ज्यादा कोशिश में
वह एक बार और फिसला और गिर गया।
पराजय!वह यहाँ पर खामोशी से पडा रहा
-उसकी आँख से एक आँसू टपका-
"अब दौडने से कोई फायदा नहीं है-
तीन बार गिर चुका हूँ:अब मैं बाहर हूँ!कोशिश क्यों करूँ?"
उठने की इच्छा गायब हो गई थी;
सारी उम्मीद हवा हो गई थी;
इतना ज्यादा पीछे,इतनी गलतियाँ करने वाला:
पराजित।
"मै हार चुका हूँ,इसलिए क्या फायदा." उसने सोचा,
"मैं अपमान के साथ जी लूँगा।"
लेकिन फिर उसने अपने डैडी के बारे में सोचा,
जिनका उसे जल्द ही सामना करना पडेगा।
"उठ जाओ,"एक आवाज गूँजी।"उठ जाओ और अपनी जगह लो,
तुम यहाँ प असफल होने के लिए नहीं आये हो।
उठो और दौड़ जीत लो।
अपनी इच्छा सकती को जगाओ और उठ जाओ,
"तुम बिल्कुल भी नही हारे हो।
क्योंकि जीतने का मतलब यही है:
जब भी गिरो तो उठ कर खडे हो जाओ।"
इसलिए वह एक बार फिर भागने के लिए उठा
और नये संकल्प के साथ
उस ने ठान लिया कि जीत हो या हार,
कम से कम वह मैदान नहीं छोडेगा।
अब वह दुसरों से बहुत पीछे था
-सबसे पीछे था-
लेकिन फिर भी उसने पूरी ताकत लगा दी,
और ऐसे दौडा जैसे जीतने के लिए दौड रहा है।
वह तीन बार गिरा था;
तीन बार उठा था;
वह इतना ज्यादा पीछे था कि जीतने की कोई उम्मीद नहीं थी
फिर भी वह आखिर तक दौडा।
दर्शकों ने विजेता धावक के लिए ताली बजाई,
जिसने रेखा को सबसे पहले पार किया।
सिर तना हुआ, गर्वीला और खुस;
न गिरा, न अपमान सहा।
लेकिन जब गिरे हुए बच्चे ने,
सबसे आखिर में लाईन पार की
तो दर्शकों ने उससे भी ज्यादा तालियाँ बजाई।
क्यों कि उसने दौड़ पूरी कर ली थी।
शनिवार, 3 अप्रैल 2010
उसके जैसा भाई
आफिस से बाहर आकर रवी अपनी फारारी की तरफ देखता है जो उसके भाई ने उसके बर्थ डे पर परसों ही गिफ्ट दिया है।वो सोचता है कि वो कितना खुश किसमत है जो उसको इतना प्यार करने वाला भाई मिला।तभी एक लड़के की आवाज से उसका ध्यान भंग हो जाता है।वो देखता है कि एक लडका जो देखने से ही गरीब दिख रहा है उससे कहता है क्यों साहब आज बहुत खुस दिख रहे हो।फिर लडका तपाक से उससे कहता है कि क्यों साहब क्या आप मुझे अपने कार में घुमायेंगे ?कोई और दिन होता तो रवी उसको मना कर देता लेकिन आज वो बहुत खुस था।
कुछ देर बाद रवी और लडका कार में थे।कुछ देर बाद लडका कहता है कि साहब क्या आप अपनी कार मेरे मुहल्ले से ले के चलेंगे?रवी भाँप जाता है कि लडका क्या चाहता है वो शायद अपने मुहल्ले वालों पर रोब डालना चाहता है।अब कार लडके के मुहल्ले में थी।
तभी लडका एक घर के सामने रूक कर कहता है,एक मिनट साब जाईयेगा नहीं मै अपने छोटे भाई को लेकर आता हूँ।और वह घर के अन्दर भाग जाता है।कुछ देर बाद वह घर से बाहर आता है उसके हाथ में उसका छोटा भाई होता है जो चल नहीं सकता है।उसको कार की तरफ इसारा करते हुए वह कहता है छोटे एक दिन मै तुझे भी इसी तरह की कार दुंगा शाहब से पूछ लो उनको ये कार इनके बडे भाई ने दिया है यह कह कर वह घर के अन्दर चला गया...................
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बुधवार, 17 मार्च 2010
बचाने लायक जिन्दगी
एक बच्चा समुद्र में डूब रहा था।एक व्यक्ति ने अपनी जान जोखिम में डालकर तूफानी लहरों का सामना करते हुये उसे बचा लिया।जैसे ही बच्चा इस दहशत भरे अनुभव से उबरा, उसने उस आदमी से कहा,"मेरी जिंदगी बचाने के लिए धन्यवाद।"
उस आदमी ने लडके की आँखों में आँखे डालकर कहा," वह तो ठीक है ,बेटे।बस इतना ध्यान रखना कि तुम्हारी जिंदगी बचाने लायक थी।"
उस आदमी ने लडके की आँखों में आँखे डालकर कहा," वह तो ठीक है ,बेटे।बस इतना ध्यान रखना कि तुम्हारी जिंदगी बचाने लायक थी।"
गुरुवार, 11 मार्च 2010
आप इंतजार क्यों कर रहे हैं...................
अगर हमें यह पता चले कि हमारे पास जिंदगी में सिर्फ पाँच ही मिनट बचे है, जिसमें हमे वह सब कहना है जो हम कहना चाहते हैं।तो दुनिया के हर टेलिफोन बूथ पर भीड़ लग जायेगी और लोग अटकते हुए दूसरों को फोन पर बताएँगे कि वे उन्हें प्यार करते थे।
क्रिस्टोफर मोर्ली
अगर आप जल्दी ही मरने वाले हों और आपको सिर्फ एक फोन करने का समय मिले,तो आप किसे फोन करेंगे और आप क्या कहेंगे?और आप इंतजार क्यों कर रहे हैं...................
स्टीफन लेवाइन
क्रिस्टोफर मोर्ली
अगर आप जल्दी ही मरने वाले हों और आपको सिर्फ एक फोन करने का समय मिले,तो आप किसे फोन करेंगे और आप क्या कहेंगे?और आप इंतजार क्यों कर रहे हैं...................
स्टीफन लेवाइन
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