एक दिन सुबह सुबह एक पादरी ,एक डाक्टर व एक इंजीनियर गोल्फ के मैदान में जाते हैं
।उनसे पहले एक ग्रुप वहाँ था, जो थोडी़ धीमी गति से गोल्फ खेल रहा था।इंजीनियर बोला,ये बुद्धु लोग कौन हैं हम यहाँ पन्द्रह मिनट से प्रतिछा कर रहें हैं।डाक्टर बोला मैने ऐसा बेकार गोल्फ कभी नहीं देखा।पादरी बोला वह देखो मैदान का मालिक आ रहा है उससे पुछते हैं।उसने पुछा जार्ज ये ग्रुप इतना धीमें क्यों खेल रहा है।इनकी क्या समस्या है?
जार्ज ने उन्हें बताया कि यह नेत्रहीन ग्रुप है जिनकी आख इस गोल्फ क्लब को आग से बचाते समय चली गई।अत: हम इन्हें जितनी देर चाहे खेलने देते हैं।
सब लोग थोडी देर के लिये चुप हो जाते हैं।पादरी कहता है मै इनके लिये आज रात प्रार्थना करूगा।
डाक्टर बोला मै अपने डाक्टर मित्रों से इनके आँख के बारे में चर्चा करूगा।
इंजीनियर बोला यह लोग रात को क्यों नहीं खेलते।
किसी परिस्थिति पर हर व्यक्ति अपने तरीके से सोचता है।इंजीनियर यहाँ पर समस्या के समाधान के बारे में सोच रहा है।
गुरुवार, 26 फ़रवरी 2009
रविवार, 22 फ़रवरी 2009
दर्द का क्या है वो तो गुजर जाता है
महान फ्रांसिसी पेन्टर रेनुआ गठिया रोग से पीडि़त थे।परन्तु फिर भी वे पेन्टिंग करते थे।ब्रश पकडने में उन्हें असहनीय पीडा़ उठानी पड़ती थी।एक दिन उन्हें ऐसा करते देख उनके मित्र ने कहा कि आखिर वो ऐसा क्यों करते हैं?
पियरे रेनुआ ने कहा,"दर्द का क्या है वो तो गुजर जाता है,परन्तु खू़बसूरती रह जाती है।
पियरे रेनुआ ने कहा,"दर्द का क्या है वो तो गुजर जाता है,परन्तु खू़बसूरती रह जाती है।
बुधवार, 18 फ़रवरी 2009
मै अपने लड़को को भी बड़ा कर रहा हूँ
एक किसान के कई लड़के थे और वह उनसे
खेत पर बहुत मेहनत करता था।
एक दिन उसके पडो़सी ने कहा फसल
उगाने के लिये लड़को से इतनी
मेहनत कराना जरूरी नहीं।किसान
ने शान्त रूप से लेकिन दृढ़ता से जवाब
दिया,"मै सिर्फ फ़सल बडी़ नहीं कर रहा,बल्कि मै अपने लड़को को भी बड़ा कर रहा हूँ।
शुक्रवार, 26 दिसंबर 2008
नये साल का संकल्प
मै तब तक जुटा रहूँगा जब तक मै सफल ना हो जाऊँ ।
मै इस संसार में हारने के लिये नहीं आया हूँ ,
न ही मेरी शिराओं में असफलता प्रवाहित हो रही है ।
मै कोई भेड़ नहीं जिसे कोई गडिर्या हाँके।
मै एक शेर हूँ और मै भेडो़ की झुँड की तरह
बात करने, चलने और सोने से इंकार करता हूँ।
असफलता की बलिवेदी मेरा भाग्य नहीं बन सकती।
मै तब तक जुटा रहूँगा जब तक मै सफल ना हो जाऊँ ।
मै इस संसार में हारने के लिये नहीं आया हूँ ,
न ही मेरी शिराओं में असफलता प्रवाहित हो रही है ।
मै कोई भेड़ नहीं जिसे कोई गडिर्या हाँके।
मै एक शेर हूँ और मै भेडो़ की झुँड की तरह
बात करने, चलने और सोने से इंकार करता हूँ।
असफलता की बलिवेदी मेरा भाग्य नहीं बन सकती।
मै तब तक जुटा रहूँगा जब तक मै सफल ना हो जाऊँ ।
नये साल में मै ये करूँगा
अगर मै निराश हूँ तो मै गाऊँगा ।
अगर मै दुखी हूँ तो मै हँसूंगा ।
अगर मै बीमार हूँ तो दुगुना काम करूँगा ।
अगर मुझे डर लगता है तो तेजी से मै आगे बढ़ जाऊँगा ।
अगर मै खुद को हीन समझता हूँ तो नये वस्त्र पहनूँगा ।
अगर मै अनिश्चय की स्थिति में हूँ तो मै अपनी आवाज बढा़ लूँगा ।
अगर मै गरीबी का अनुभव करता हूँ तो मै आगे आने वाले दौलत के बारे में सोचूँगा ।
अगर मै खुद को अयोग्य समझता हूँ तो अपनी पिछली सफलता के बारे में सोचूँगा ।
अगर मै खुद को महत्वहीन समझता हूँ तो मै अपने लक्ष्यों के बारे में सोचूँगा ।
अगर मै दुखी हूँ तो मै हँसूंगा ।
अगर मै बीमार हूँ तो दुगुना काम करूँगा ।
अगर मुझे डर लगता है तो तेजी से मै आगे बढ़ जाऊँगा ।
अगर मै खुद को हीन समझता हूँ तो नये वस्त्र पहनूँगा ।
अगर मै अनिश्चय की स्थिति में हूँ तो मै अपनी आवाज बढा़ लूँगा ।
अगर मै गरीबी का अनुभव करता हूँ तो मै आगे आने वाले दौलत के बारे में सोचूँगा ।
अगर मै खुद को अयोग्य समझता हूँ तो अपनी पिछली सफलता के बारे में सोचूँगा ।
अगर मै खुद को महत्वहीन समझता हूँ तो मै अपने लक्ष्यों के बारे में सोचूँगा ।
बुधवार, 24 दिसंबर 2008
मुझे इतनी उँचाई कभी मत देना
धरती को बौनों की नहीं,
उँचे कद के इन्सानों की जरूरत है,
किंतु इतने उँचे भी नहीं,
कि पांव तले दूब ही न जमें,
कोई कांटा न चुभे, कोई कली न खिले,
न बसंत हो न पतझड़,हो सिर्फ उँचाई का अंधड़,
मात्र अकेलेपन का सन्नाटा,
मेरे प्रभु,मुझे इतनी उँचाई कभी मत देना,
मेरे प्रभु,मुझे इतनी उँचाई कभी मत देना,
गैरों को गले लगा ना सकूं,
इतनी रूखाई कभी मत देना,
**********************
चोटी से गिरने से अधिक चोट लगती है,
अस्थि जुड़ जाती है पीडा़ मन को सुलगाती है,
इसका अर्थ यह भी नहीं कि,
चोटी पर चढ़ने की चुनौती ही ना मानें,
इसका अर्थ यह भी नहीं कि,
परिस्थिति पर विजय पाने की न ठाने॥,
********************************
बुधवार, 3 दिसंबर 2008
सफल होने के लिये प्लान जरूरी

एक बार एक मक्खी को कमरें में बन्द कर
दिया गया ,और कहा गया कि तुम्हें १२ घंटे
में इसमें से बाहर निकलना है।मक्खी बहुत
ही आशावादी व उत्साहित थी,वह दूर से उड़ती
हुई आती है और दिवार से टकरा जाती है,वह
बार-बार ऐसा करती है हार नहीं मानती है
और अन्त में वीर गति को प्राप्त हो जाती है।
अब दूसरी मक्खी को यही कार्य दिया जाता
है,वह पहले ६ घंटे सोचती है फिर बगल में
एक छेद देखती है और उससे निकल जाती
है।
केवल उत्साहित व आशावादी होने से कुछ
नहीं होता सफल होने के लिये आपके पास
प्लान होना चाहिये।
दिया गया ,और कहा गया कि तुम्हें १२ घंटे
में इसमें से बाहर निकलना है।मक्खी बहुत
ही आशावादी व उत्साहित थी,वह दूर से उड़ती
हुई आती है और दिवार से टकरा जाती है,वह
बार-बार ऐसा करती है हार नहीं मानती है
और अन्त में वीर गति को प्राप्त हो जाती है।
अब दूसरी मक्खी को यही कार्य दिया जाता
है,वह पहले ६ घंटे सोचती है फिर बगल में
एक छेद देखती है और उससे निकल जाती
है।
केवल उत्साहित व आशावादी होने से कुछ
नहीं होता सफल होने के लिये आपके पास
प्लान होना चाहिये।
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