- विश्व की महानतम खोजों के पीछे मानवीय भूलों का हाथ होता है।
- यदि आप समझते हैं कि आप विज्ञान या औरत या कंप्यूटर को जानते हैं तो सही मायने में आप विशेषज्ञ नहीं हैं।
- प्रमेय-हर सफल आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है।
- उपप्रमेय-हर असफल आदमी के पीछे दो औरतों का हाथ होता है।
- बास के आगे और गधे के पीछे कभी ना चलें।
- पीठ पर साबासी की थपकी और कुल्हे पर लात पड़ने के बीच कुछ इन्च का अन्तर होता है।
- सफलता भाग्य पर ही निर्भर करती है किसी भी असफल से पूछ के देख ले।
- जो चीज गूगल में ना मिले उसका अस्तित्व ही नहीं है।
- जो ब्लाग आप अरूचि पूर्वक लिखते हैं उस पर आप को ढेरों प्रशंसा मिलती है।
- किसी आफिस में किसी अधिकारी का अधिकार उसके द्वारा रखे जाने वाले पेनों की संख्याके विलोमानुपाती होता है।
सोमवार, 1 दिसंबर 2008
मरफी के नियम-३
रविवार, 30 नवंबर 2008
भगवान आप के लिये कुछ सोच रहें हैं
आज मैंने प्रादेशिक समाचार में देखा कि यूपी के फतेहपुर जिले के किसी आदमी का रेल में सफर करते वक्त हाथ कट गया ।आप कहेंगे ऐसा तो होता रहता है इसे ब्लाग में लिखने की क्या आवश्यक्ता पड गई।
अरे भाई आगे तो सुनिये उस आदमी ने प्रकृति द्वारा किये गये इस अन्याय का सूद समेत बदला ले लिया।
उन्होंने हार नहीं मानी बल्कि बिना हाथ के ही साइकिल चलाना सिखा व साइकिल पर तरह तरह के करतब दिखाने लगे।
पहले उन्हें कोई नहीं जानता था अब उन्हें पूरा फतेहपुर क्या पूरा यूपी जानता है।
यदि आपकी जिन्दगी में दुख हो,अन्धेरा हो तो ध्यान दे शायद भगवान आप के लिये कुछ सोच रहें हैं।शायद वे आप से कुछ कराना चाहते हैं।
अरे भाई आगे तो सुनिये उस आदमी ने प्रकृति द्वारा किये गये इस अन्याय का सूद समेत बदला ले लिया।
उन्होंने हार नहीं मानी बल्कि बिना हाथ के ही साइकिल चलाना सिखा व साइकिल पर तरह तरह के करतब दिखाने लगे।
पहले उन्हें कोई नहीं जानता था अब उन्हें पूरा फतेहपुर क्या पूरा यूपी जानता है।
यदि आपकी जिन्दगी में दुख हो,अन्धेरा हो तो ध्यान दे शायद भगवान आप के लिये कुछ सोच रहें हैं।शायद वे आप से कुछ कराना चाहते हैं।
मरफी के नियम-२
माँ हमेशा कहती थी कि कठिन दौर जीवन में आयेगें मगर इतने सारे आयेगें ये उन्होंनेनहीं बताया था।
घर पर बाल पेन की उप्लब्धता उसकी आवश्यक्ता के विलोमानुपाती होती है।
हर आदमी के पास धनवान बनने की योजनायें होती हैं ये अलग बात है कि वे काम नहींकरती।
जानवरों से प्रेम करो क्योंकि वे स्वादिष्ट होते हैं।
पडोसियों से प्रेम करना चाहिये मगर कभी पकड़ा नहीं जाना चाहिये वरना बडी़ कुटाई होती है।
आप के सामने वाली लाईन ज्यादा तेज चलती है यदि आप लाईन बदल लेते हैं तो भी ये सही है।
प्यार और जुकाम में अन्तर सिर्फ इतना है कि जुकाम का अब वैक्सिन उपल्बध है।
प्यार में पडने से पहले अपना बैक अप बना लें रिकवरी में आसानी होगी।
प्रमेय-आप के पडो़स की लाईबरेरी में काम लायक एक भी कितब उपल्बध नहीं होती।
उपप्रमेय-आप के काम की किताबें दूर वाली लाईबरेरी में उप्लब्ध होती हैं।
घर पर बाल पेन की उप्लब्धता उसकी आवश्यक्ता के विलोमानुपाती होती है।
हर आदमी के पास धनवान बनने की योजनायें होती हैं ये अलग बात है कि वे काम नहींकरती।
जानवरों से प्रेम करो क्योंकि वे स्वादिष्ट होते हैं।
पडोसियों से प्रेम करना चाहिये मगर कभी पकड़ा नहीं जाना चाहिये वरना बडी़ कुटाई होती है।
आप के सामने वाली लाईन ज्यादा तेज चलती है यदि आप लाईन बदल लेते हैं तो भी ये सही है।
प्यार और जुकाम में अन्तर सिर्फ इतना है कि जुकाम का अब वैक्सिन उपल्बध है।
प्यार में पडने से पहले अपना बैक अप बना लें रिकवरी में आसानी होगी।
प्रमेय-आप के पडो़स की लाईबरेरी में काम लायक एक भी कितब उपल्बध नहीं होती।
उपप्रमेय-आप के काम की किताबें दूर वाली लाईबरेरी में उप्लब्ध होती हैं।
मंगलवार, 25 नवंबर 2008
खुस होने के नियम
प्रकृति का नियम: जो चीज आप खुद प्राप्त करना चाहते हैं उसे दुसरों को प्राप्त करने में मदद करें,आप को वो चीज खुद मिल जायेगी।
आप खुस होना चाहते हैं तो दूसरों को खुस करें बस सीधा सा नियम है
नीचे कुछ कुस होने के तरीके दिए जा रहें आप को भी कुछ तरीके मालूम हो तो मुझे अवश्य बताएं
गली के सभी पिल्लों को नहला दें।
पाँच नये ब्लागरों को रोजना कमेन्ट दें।
ब्लाग लिखें।
किसी शापिंग माल में जाये, मंहगे कपड़े पहने,मोबाईल से फोटो खिंचे,खरिदी न करें।
स्कुल बस में बच्चों को देखकर हाथ हिलायें।
किसी रोते को हसाँये।
अपने लिये फूल खरीदें दुसरे को दें।
अपने आप को पत्र लिखें।
किसी दिन हर बात पर असहमत हों।
लिफ्ट में अकेले हों तो नाचें।
अपना कमरा साफ करें।
खुद मेहमान बनकर अपनी ही खातिरदारी करें।
किसी को प्रोत्शाहित करें।
किसी जानवर की फोटो लें,नीचे लिखे मिसिंग,लोगो से उसके बारे में पूछें।
कोई गाना लिखें व छत पर चिल्लाकर गायें।
गुल्ली डंडा खेलें।
आकर्षण का नियम-भाग एक
क्या आपके साथ ऐसा हुआ है कि दिन भर आप
कोइ गाना गुनगुना रहें हैं और जैसे ही साम को
आप अपना रेडियो खोलते हैं तो वही गाना रेडियो
पर आ रहा हो।मेरे साथ ऐसा कई बार हुआ है।
याद करिये जब आप छोटे थे और जब आप
क्रिकेट खेलते थे तो किसी महत्वपूर्ण मैच में
आप कुछ खास नहीं कर पाते थे।जबकि
प्रैक्टिस मैच में आप हरदम बढी़या खेलते थे।
जब आप स्कुल के दिनों में थे तो परीक्षक के सामने
आपकी कैसी घिग्घी बध जाती थीऔर आप उन प्रश्नों
के भी उत्तर नहीं बता पाते थे जो आप को अच्छे से याद होते थे।
क्या आपने ऐसा सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?
अगली लाइन ध्यान से पढिये।
चाहे आप मुम्बई के हों चाहे बिहार के या
यूपी के या दिल्ली के या आप दुनिया
के किसी भी देश के हों।
हम सब एक ही नियम से काम कर रहें हैं।
उस नियम का नाम है "आकर्षण"।
आप के जीवन में जो कुछ भी हो रहा
है आप उसे आकर्षित कर रहें हैं।
चाहे रेडिओ पर गाना बजना हो या मैच में
खराब प्रदर्शन या परीछक के सामने हडबडाना।
आप दिन भर गाने के बारे में सोचते हैं और साम को रेडियो पर उसे आकर्षित कर लेते हैं।
क्या परीछक के सामने जाने से पहले आप ये नहीं सोचते कि कहीं मै ठीक से उत्तर ना दे पाउँ और आप इसी को आकर्षित कर लेते हैं मैच में भी यही होता है।
"यदि आप वाकई कुछ चाहते हैं तो उसे प्राप्त करने की स्थितियाँ भी पैदा कर लेगे"
कोइ गाना गुनगुना रहें हैं और जैसे ही साम को
आप अपना रेडियो खोलते हैं तो वही गाना रेडियो
पर आ रहा हो।मेरे साथ ऐसा कई बार हुआ है।
याद करिये जब आप छोटे थे और जब आप
क्रिकेट खेलते थे तो किसी महत्वपूर्ण मैच में
आप कुछ खास नहीं कर पाते थे।जबकि
प्रैक्टिस मैच में आप हरदम बढी़या खेलते थे।
जब आप स्कुल के दिनों में थे तो परीक्षक के सामने
आपकी कैसी घिग्घी बध जाती थीऔर आप उन प्रश्नों
के भी उत्तर नहीं बता पाते थे जो आप को अच्छे से याद होते थे।
क्या आपने ऐसा सोचा है कि ऐसा क्यों होता है?
अगली लाइन ध्यान से पढिये।
चाहे आप मुम्बई के हों चाहे बिहार के या
यूपी के या दिल्ली के या आप दुनिया
के किसी भी देश के हों।
हम सब एक ही नियम से काम कर रहें हैं।
उस नियम का नाम है "आकर्षण"।
आप के जीवन में जो कुछ भी हो रहा
है आप उसे आकर्षित कर रहें हैं।
चाहे रेडिओ पर गाना बजना हो या मैच में
खराब प्रदर्शन या परीछक के सामने हडबडाना।
आप दिन भर गाने के बारे में सोचते हैं और साम को रेडियो पर उसे आकर्षित कर लेते हैं।
क्या परीछक के सामने जाने से पहले आप ये नहीं सोचते कि कहीं मै ठीक से उत्तर ना दे पाउँ और आप इसी को आकर्षित कर लेते हैं मैच में भी यही होता है।
"यदि आप वाकई कुछ चाहते हैं तो उसे प्राप्त करने की स्थितियाँ भी पैदा कर लेगे"
सोमवार, 24 नवंबर 2008
दो मिनट में मोटिवेट हों
जब आप थके हों
जब आप को लगे आप कुछ नहीं कर सकते
जब आप निराश हों
जब आप को लगे सारा सिस्टम ख़राब है
यह दो मिनट का विडियो देखें मेरा दावा है
इसे देखते ही आप मोटिवेट हो जायेंगे
जब आप को लगे आप कुछ नहीं कर सकते
जब आप निराश हों
जब आप को लगे सारा सिस्टम ख़राब है
यह दो मिनट का विडियो देखें मेरा दावा है
इसे देखते ही आप मोटिवेट हो जायेंगे
रविवार, 23 नवंबर 2008
सफलता के चार नियम
कल मैने चेतन भगत की प्रसिद्ध किताब
one night @the call centreपढ़ी उसमें
मुझे भगवान का फोन करनाव सफलता के
चार नियम बताना सबसे अच्छा लगा।
चलिये वो नियम मै आपकोभी बताता हूँ।
पहला नियम-सफल होने के लिये मनुष्यमें थोडी़ बहुत बुद्धिमानी होनी चाहिये।
दूसरा नियम-मनुष्य में थोडी़ बहुत कल्पना-शक्ति होनी चाहिये।
तीसरा नियम-मनुष्य में आत्मविश्वास होना ही चाहिये।
चौथा नियम-चौथा नियम सुनकर सायद आपचौंक जाएँ।
चौथा नियम है असफलताआप जितने भी सफल
आदमियों
को जानतें होसबके बारे में विचार करें तो वे पहले
असफल हुयेफिर जा के सफल हुये।चाहे वे गाँधी जी हो,
अटल जीहों,कलाम जी हों,लिंकन हों,टाटा हों,बिल गेट्स
हों न्युटन हों आइनस्टीन हों या कोइ अन्य।
किसी ने ठीक ही कहा है
,"यदि आप सफल होना चाहते हैंतो अपनी असफलता की दर दुगनी कर दें"
जब तक आप असफल नहीं होगे तबतक आपकी
हँसी कैसेउडा़ई जायेगी ,आप गिरेंगे नहीं तो आप
का मजाक कैसे बनायाजायेगा,आप को नकारा कैसे
सिद्ध किया जा सकता है और जबतक ऐसा नहीं
होगा तब तक आप कैसे अपने आप को साबितकर
सकते हैं।आज हम लगभग जितनी भी अच्छे
वस्तुओं का उपयोग कर रहेंहैं वे दरसल ये
कुछ शुरू में हारे लोगों की सनक का नतीजा है।
one night @the call centreपढ़ी उसमें
मुझे भगवान का फोन करनाव सफलता के
चार नियम बताना सबसे अच्छा लगा।
चलिये वो नियम मै आपकोभी बताता हूँ।
पहला नियम-सफल होने के लिये मनुष्यमें थोडी़ बहुत बुद्धिमानी होनी चाहिये।
दूसरा नियम-मनुष्य में थोडी़ बहुत कल्पना-शक्ति होनी चाहिये।
तीसरा नियम-मनुष्य में आत्मविश्वास होना ही चाहिये।
चौथा नियम-चौथा नियम सुनकर सायद आपचौंक जाएँ।
चौथा नियम है असफलताआप जितने भी सफल
आदमियों
को जानतें होसबके बारे में विचार करें तो वे पहले
असफल हुयेफिर जा के सफल हुये।चाहे वे गाँधी जी हो,
अटल जीहों,कलाम जी हों,लिंकन हों,टाटा हों,बिल गेट्स
हों न्युटन हों आइनस्टीन हों या कोइ अन्य।
किसी ने ठीक ही कहा है
,"यदि आप सफल होना चाहते हैंतो अपनी असफलता की दर दुगनी कर दें"
जब तक आप असफल नहीं होगे तबतक आपकी
हँसी कैसेउडा़ई जायेगी ,आप गिरेंगे नहीं तो आप
का मजाक कैसे बनायाजायेगा,आप को नकारा कैसे
सिद्ध किया जा सकता है और जबतक ऐसा नहीं
होगा तब तक आप कैसे अपने आप को साबितकर
सकते हैं।आज हम लगभग जितनी भी अच्छे
वस्तुओं का उपयोग कर रहेंहैं वे दरसल ये
कुछ शुरू में हारे लोगों की सनक का नतीजा है।
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